काली अष्टकम् | Kali Ashtakam Lyrics In Hindi

काली अष्टकम् ( Kali Ashtakam Lyrics In Hindi ) या श्री कालिकाष्टकम् देवी काली को समर्पित एक संस्कृत स्तोत्र है। आइए जानते हैं काली अष्टकम का अर्थ, काली अष्टकम पढ़ने का महत्व, स्तोत्र।

काली अष्टकम् क्या है | Kali Ashtakam Lyrics In Hindi

काली अष्टकम् (या काली अष्टकम्) देवी काली को समर्पित एक संस्कृत भजन है। यह देवी काली के ऐश्वर्य, शक्ति, करुणा और भयानक रूप की तारीफ़ में गाया जाता है।

‘अष्टकम्’ शब्द का अर्थ है आठ श्लोकों का संकलन। यानी, काली अष्टकम देवी काली की पूजा में लिखा गया आठ श्लोकों का भजन है।

काली अष्टकम् के रचयिता

पारंपरिक रूप से, आदि शंकराचार्य को काली अष्टकम् का रचयिता माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग रीडिंग और वर्शन में कुछ अंतर हैं।

काली अष्टकम् पढ़ने का महत्व

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भक्ति के साथ काली अष्टकम पढ़ने से—

  • देवी काली के प्रति भक्ति और समर्पण बढ़ता है।
  • डर, मानसिक अस्थिरता और नकारात्मक विचारों को दूर करता है।
  • मां काली के आशीर्वाद और कृपा के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • मन शांत और एकाग्र होता है।

काली अष्टकम् स्तोत्र

॥ श्री कालिकाष्टकम् ॥

गलद्रक्तमुण्डावलीकण्ठमालामहोघोररावा सुदंष्ट्रा कराला।

विवस्त्रा श्मशानालया मुक्तकेशीमहाकालकामाकुला कालिकेयम्॥1॥

भुजे वामयुग्मे शिरोऽसिं दधानावरं दक्षयुग्मेऽभयं वै तथैव।

सुमध्याऽपि तुङ्गस्तनाभारनम्रालसद्रक्तसृक्कद्वया सुस्मितास्या॥2॥

शवद्वन्द्वकर्णावतंसा सुकेशीलसत्प्रेतपाणिं प्रयुक्तैककाञ्ची।

शवाकारमञ्चाधिरूढा शिवाभिश्-चतुर्दिक्षुशब्दायमानाऽभिरेजे॥3॥

विरञ्च्यादिदेवास्त्रयस्ते गुणांस्त्रीन्समाराध्य कालीं प्रधाना बभूबुः।

अनादिं सुरादिं मखादिं भवादिं स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः॥4॥

जगन्मोहनीयं तु वाग्वादिनीयंसुहृत्पोषिणीशत्रुसंहारणीयम्।

वचस्तम्भनीयं किमुच्चाटनीयंस्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः॥5॥

इयं स्वर्गदात्री पुनः कल्पवल्लीमनोजांस्तु कामान् यथार्थं प्रकुर्यात्।

तथा ते कृतार्था भवन्तीति नित्यं-स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः॥6॥

सुरापानमत्ता सुभक्तानुरक्तालसत्पूतचित्ते सदाविर्भवत्ते।

जपध्यानपूजासुधाधौतपङ्कास्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः॥7॥

चिदानन्दकन्दं हसन् मन्दमन्दंशरच्चन्द्रकोटिप्रभापुञ्जबिम्बम्।

मुनीनां कवीनां हृदि द्योतयन्तंस्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः॥8॥

महामेघकाली सुरक्तापि शुभ्राकदाचिद् विचित्राकृतिर्योगमाया।

न बाला न वृद्धा न कामातुरापिस्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः॥9॥

क्षमस्वापराधं महागुप्तभावं मयालोकमध्ये प्रकाशिकृतं यत्।

तव ध्यानपूतेन चापल्यभावात्स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः॥10॥

यदि ध्यानयुक्तं पठेद् यो मनुष्यस्तदासर्वलोके विशालो भवेच्च।

गृहे चाष्टसिद्धिर्मृते चापि मुक्तिःस्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः॥11॥

॥ इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं श्रीकालिकाष्टकं सम्पूर्णम् ॥

उपसंहार – आशा है आपको आज की पोस्ट से लाभ हुआ होगा। माँ काली की कृपा से आपके जीवन के सभी संकट दूर हों। यदि आप विधिपूर्वक माँ काली की पूजा करते है तो आपके जीवन सुख शांति और समृद्धि से पूर्ण होते है, आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होते है । अगर आपको इस लेख से लाभ हुआ है, तो कृपया एक कमेंट करके हमें प्रोत्साहित करें।

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