जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए। Chhath Aarti Lyrics | छठ पूजा के दौरान करें छठी मैया की आरती। आपकी सुबिधा के लिए दिया गया है छठी माता की आरती लिरिक्स हिंदी में। अंत में छठ आरती PDF भी दिया गया है। चलिए शुरू करते है।

Chhath Aarti Lyrics | छठी माता की आरती लिरिक्स हिंदी में
छठी माता की आरती लिरिक्स जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए। मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥ ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय। ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥जय॥ मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए। ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥ अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए। मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥ ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय। शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥जय॥ मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए। ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥ ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए। मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥ ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय। सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥जय॥ मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए। ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय
छठ व्रत | Chhath Vrat
छठ व्रत बहुत ही कठिन व्रत है, चार दिनों के इस व्रत में व्रति को लगातार उपवास रखना परता है (३६ घंटा)। आमतौर पर महिलाएं यह व्रत करती हैं। लेकिन पुरुषों भी उपवास रहके यह व्रत का पालन करते हैं। छठ महापर्व का व्रत स्त्री, पुरुष, बच्चे, जवान, बुढ़े सभी लोग करते हैं।व्रती महिलाओं को परवैतिन कहा जाता है।
छठ व्रत रखने वाले व्रती फर्श पर एक कम्बल या चादर बिछाकर शय्या ग्रहण करते हैं। इस उत्सव में नए कपड़े पहना जाता है, व्रती बिना सिलाई किये बस्त्र धारण करते है। छठ पर्व को शुरू करने के बाद सालों साल तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित महिला इसके लिए तैयार न हो जाए। घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता है।
मान्यता अनुसार संतान प्राप्ति के लिए, संतान की कुशलता, सफलता महिलाएँ यह व्रत रखती हैं। पुरुष भी अपने मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए छठ व्रत रखते हैं। यह व्रत बहुत ही निष्ठां से मनाया जाता है।
सूर्यदेव और छठी मैया के बीच में क्या संबंध है
शास्त्रों के अनुसार भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री हैं माँ षष्ठी, माँ षष्ठी को ही माँ छठ कहा गया है। सूर्य देव की बहन के रूप में भी माना जाता है छठ मैया को। निष्ठानुसार छठी मैया की पूजा करने से संतानप्राप्ति, संतान की कुशलता और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।
षष्ठी देवी स्तोत्र
नमो देव्यै महादेव्यै सिद्ध्यै शान्त्यै नमो नम:। शुभायै देवसेनायै षष्ठी देव्यै नमो नम: ।। वरदायै पुत्रदायै धनदायै नमो नम:। सुखदायै मोक्षदायै षष्ठी देव्यै नमो नम:।। शक्ते: षष्ठांशरुपायै सिद्धायै च नमो नम:। मायायै सिद्धयोगिन्यै षष्ठी देव्यै नमो नम:।। पारायै पारदायै च षष्ठी देव्यै नमो नम:। सारायै सारदायै च पारायै सर्व कर्मणाम।। बालाधिष्ठात्री देव्यै च षष्ठी देव्यै नमो नम:। कल्याणदायै कल्याण्यै फलदायै च कर्मणाम। प्रत्यक्षायै च भक्तानां षष्ठी देव्यै नमो नम:।। पूज्यायै स्कन्दकांतायै सर्वेषां सर्वकर्मसु। देवरक्षणकारिण्यै षष्ठी देव्यै नमो नम:।। शुद्ध सत्त्व स्वरुपायै वन्दितायै नृणां सदा। हिंसा क्रोध वर्जितायै षष्ठी देव्यै नमो नम:।। धनं देहि प्रियां देहि पुत्रं देहि सुरेश्वरि। धर्मं देहि यशो देहि षष्ठी देव्यै नमो नम:।। भूमिं देहि प्रजां देहि देहि विद्यां सुपूजिते। कल्याणं च जयं देहि षष्ठी देव्यै नमो नम:।।
ध्यान मंत्र
ध्यान मंत्र षष्ठांशां प्रकृते: शुद्धां सुप्रतिष्ठाण्च सुव्रताम्। सुपुत्रदां च शुभदां दयारूपां जगत्प्रसूम्।।
छठी मैया की कितने नाम है
छठी मैया को मिथिला में माँ रनबे भी कहा जाता है, भोजपुरी में सबिता माई कहा जाता है और बंगाली में रनबे ठाकुर के नाम से बुलाया जाता है। देवी पार्वती का छठा रूप है सूर्य देव की बहन छठी मैया के रूप में पूजा जाता है।
Chhath Aarti Lyrics PDF [DOWNLOAD]
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उपसंहार – आशा है आपको आज की पोस्ट से लाभ हुआ होगा। छठ मइया की पूजा आराधना करने से आपके जीवन में छठी माँ की कृपा बनी रहती है, आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होते है । यदि आपको इस लेख से लाभ हुआ है, तो कृपया एक कमेंट कर हमें प्रोत्साहित करें।
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